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Author: osholifestyle

Motivation

तो क्या सत्य की खोज में किसी भी सहारे की कोई जरूरत नहीं है? OSHO 

प्रश्न: भगवान बुद्ध ने कहा है: अपने दीए आप बनो। तो क्या सत्य की खोज में किसी भी सहारे की कोई जरूरत नहीं है? यह जानने को भी तुम्हें बुद्ध के पास जाना पड़ेगा न!-अपने दीए आप बनो। इतनी ही जरूरत है गुरु की। गुरु तुम्हारी…

Emotional Ecology

इधर कुछ दिनों से मैं बहुत उदास रहने लगा हूं — अकारण। OSHO 

तुम पकड़ रहे हो; यही सारी समस्या हो सकती है| तुम जीवन पर विश्वास नहीं करते| भीतर कहीं गहरे में जीवन के प्रति गहरा अविश्वास है, मानो तुम अगर नियंत्रण नहीं कर पाते, तब चीजें गलत हो जाएंगी। और अगर तुम उन पर नियंत्रण कर…

Media and Publishing

डॉक्टर क्या कहते हैं 

जर्मनी के प्रसिद्ध साईकिएट्रिक सैनिटेरियम में सक्रिय ध्यान और कुंडलिनी ध्यान जर्मनी के डाक्टर जोआकिम गलूस्का मानसिक रोगियों के लिए एक मनोरोग-निदानशाला चलाते हैं। हाइलिगिनफेल्ट नामक इस सैनिटेरियम में प्रारंभ से ही ओशो ध्यान विधियां उपचार पद्धति का एक आवश्यक हिस्सा हैं। सक्रिय ध्यान के…

Media and Publishing

इंदिरा गांधी ओशो से प्रभावित थीं और उन्होंने अपने बेटे राजीव गांधी को राजनीति में लाने के लिए ओशो की सचिव लक्ष्मी की मदद ली थी. 

ओशो की वजह से राजीव राजनीति में आए? क्या आप सोच सकते हैं कि भारत के छठे प्रधानमंत्री राजीव गांधी और आध्यात्मिक गुरु ओशो के बीच कुछ संबंध हो सकता है. दरअसल एक नई किताब में इसे लेकर एक दावा किया गया है. समाचार एजेंसी…

Media and Publishing

एडिनबरा के रहने वाले ह्यूग मिल ने 90 रॉल्स रॉयस कारों के लिए मशहूर रहे रजनीश के साथ दशकों गुजारे थे. 

‘सेक्स गुरु’ ओशो की ‘नाकामी’ उनके बॉडीगार्ड की ज़बानी ह्यूग मिल्ल शुरुआती दिनों में ही ‘सेक्स गुरु’ कहे जाने वाले भगवान श्री रजनीश के चेले बन गए थे, लेकिन प्यार और दया पर आधारित समाज का उनका सपना ताश के पत्तों की तरह बिखर गया….

Media and Publishing

शीला रजनीश ओशो के दर्शन, उनके विचारों पर क्या सोचती थीं BBC EXCLUSIVE 

BBC EXCLUSIVE: ‘मैंने जो किया ओशो के प्यार में किया’ इशलीन कौरबीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए, स्विट्ज़रलैंड से ‘क्या मुझे अपने जीवन में किसी बात का अफ़सोस है? मेरा जवाब है- नहीं.’ आंखें झपकाए बिना शीला कहती हैं. कभी ‘मां आनंद शीला’ के नाम…

Emotional Ecology

पहला आपरेशन था पूरी पृथ्वी पर, जो बिना बेहोशी की दवा दिए किया गया। OSHO 

काशी नरेश के पेट का आपरेशन हुआ १९१५ के करीब। वह पहला आपरेशन था पूरी पृथ्वी पर, जो बिना बेहोशी की दवा दिए किया गया। पहले तो डाक्टर ने इनकार कर दिया। तीन अंग्रेज डाक्टर थे। उन्होंने इनकार कर दिया कि यह संभव नहीं है।…

Guide

आस-पास के लोग अभी भी पागल ही समझते हैं एक-दूसरे को। OSHO 

डाइनैमिक मेडिटेशन के दूसरे चरण में रेचन करना एक पागलपन प्रतीत होता है। इस संबंध में एक ध्यानी का प्रश्न: “यदि घर पर इसे हम जारी रखेंगे, चिल्लाएं या नाचें या हंसें तो आस-पास के लोग पागल समझने लगेंगे।” आस-पास के लोग अभी भी पागल…