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Category: Emotional Ecology

Emotional Ecology, Guide

महत्वपूर्ण विचार केवल वह है जो तुममें पैदा होता है, तुम्हारे भीतर विकसित होता है 

अपनी आवाज पुन: पहचानें  ‘यदि तुम अपने झुकाव के अनुसार चुनते हो, अपने अंतर्ज्ञान के अनुसार…(आंतरिक आवाज)बच्चों में बहुत तीब’ होती है परंतु वह धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है। मां-बाप की, शिक्षकों की, समाज की और पुरोहितों की आवाजें क’मश: तेज होती जाती हैं। अब…

Emotional Ecology, Vision

शांति की खोज | शांति कैसे मिले? | शांति और अशांति 

मेरे पास न मालूम कितने लोग आते हैं। वे कहते हैं, शांत कैसे हों? मैं उनसे पूछता हूं कि पहले तुम मुझे बताओ कि तुम अशांत कैसे हुए? क्योंकि जब तक यह पता न चल जाए कि तुम कैसे अशांत हुए, तो शांत कैसे हो…

Emotional Ecology

इधर कुछ दिनों से मैं बहुत उदास रहने लगा हूं — अकारण। OSHO 

तुम पकड़ रहे हो; यही सारी समस्या हो सकती है| तुम जीवन पर विश्वास नहीं करते| भीतर कहीं गहरे में जीवन के प्रति गहरा अविश्वास है, मानो तुम अगर नियंत्रण नहीं कर पाते, तब चीजें गलत हो जाएंगी। और अगर तुम उन पर नियंत्रण कर…

Emotional Ecology

पहला आपरेशन था पूरी पृथ्वी पर, जो बिना बेहोशी की दवा दिए किया गया। OSHO 

काशी नरेश के पेट का आपरेशन हुआ १९१५ के करीब। वह पहला आपरेशन था पूरी पृथ्वी पर, जो बिना बेहोशी की दवा दिए किया गया। पहले तो डाक्टर ने इनकार कर दिया। तीन अंग्रेज डाक्टर थे। उन्होंने इनकार कर दिया कि यह संभव नहीं है।…

Emotional Ecology, Osho On Topics

तुम जिम्मेदारी शब्द का अर्थ तक नहीं समझते। OSHO 

तुम जिम्मेदारी शब्द का अर्थ तक नहीं समझते। समाज बड़ा चालाक है। इसने हमारे सबसे सुंदर शब्दों को विकृत अर्थ देकर नष्ट कर दिया है। सामान्यतया तुम्हारे शब्दकोशों में ‘जिम्मेदारी’ का मतलब कर्तव्य होता है, चीजों को उस तरह से करना जिस तरह से तुम्हारे…

Emotional Ecology

दुनिया में चेतना नहीं है। यह एक सामूहिक बेहोशी है। – OSHO 

भीड़ मैं दुनिया में किसी तरह की भीड़ नहीं चाहता। वह चाहे धर्म के नाम पर इकट्ठी हुई हो, या देश के नाम पर, या वर्ग के नाम पर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। भीड़ उस रूप में एक कुरूप चीज है, और भीड़ ने…

Emotional Ecology, Motivation

जनसंख्या विस्फोट – Population explosion OSHO 

जनसंख्या विस्फोट उन्नीस सौ सैंतालीस में जितनी हमारी संख्या थी पूरे हिंदुस्तान-पाकिस्तान की मिल कर, आज अकेले हिंदुस्तान की उससे ज्यादा है। यह संख्या अगर इसी अनुपात में बढ़ी चली जाती है और फिर दुख बढ़ता है, दारिद्रय बढ़ता है, दीनता बढ़ती है, बेकारी बढ़ती…

Emotional Ecology, Guide

सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि हर आदमी किसी और जैसा होना चाह रहा है OSHO 

किसी और जैसे बनने की कोशिश किस लिए? मनुष्य के साथ यह दुर्भाग्य हुआ है। यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य है, अभिशाप है जो मनुष्य के साथ हुआ है कि हर आदमी किसी और जैसा होना चाह रहा है और कौन सिखा रहा है यह? यह…