अनुभव करो कि तुम वजन रहित हो।

जब बैठोगे तब ऐसा अनुभव करो कि तुम वजन रहित हो गए हो, तुम्हारा कोई वजन नहीं है। तुम्हें ऐसा लगेगा को कहीं न कहीं कोई वजन है लेकिन वजन न होने को अनुभव करते रहो। वह आता है। एक क्षण आता है जब तुम अनुभव करते हो कि तुम वजन रहित हो, कि तुम्हारा कोई वजन नहीं है। जब कोई वजन अनुभव नहीं होता तब तुम शरीर नहीं होते, क्योंकि वजन शरीर का होता है, तुम्हारा नहीं। तुम वजन रहित हो।
तुम्हें स्वयं को सम्मोहन से अलग करना है।” मैं शरीर हूं और इसलिए मैं वजन को अनुभव करता हूं” ,यह एक तरह का सम्मोहन है। यदि इस सम्मोहन को गिरा सको कि तुम शरीर नहीं हो तो तुम शरीर के वजन को अनुभव नहीं करोगे। और जब तुम वजन अनुभव नहीं अक्रोगे तब तुम मन के पार जाओगे।
सिद्धासन की विधि, जिस तरह बुद्ध बैठते हैं, वजन रहित होने का सबसे बढ़िया तरीका है। जमीन पर बैठो, कुर्सी या और किसी आसन पर नहीं, सिर्फ जमीन पर। बुद्ध आसन में बैठकर, बद्ध — तुम्हारे हाथ बंधे हुए, तुम्हारे पांव बंधे हुए, इससे सहयोग मिलता है क्योंकि तब तुम्हारी आंतरिक विद्युत एक सर्किट में घूमने लगती है। तुम्हारी रीढ़ सीधी रहे। अब तुम्हें पता लगेगा कि रीढ़ सीधी रखने पर इतना जोर क्यों दिया गया है। क्योंकि सीधी रीढ़ के साथ कम से कम जगह घेरी जाती है इसलिए गुरुत्वाकर्षण तुम पर कम प्रभाव डालता है।
आंखें बंद करके अपने आपको संतुलित करो, केंद्रित करो। दांये झुको और गुरुत्वाकर्षण को अनुभव करो, बांये झुको और गुरुत्वाकर्षण को अनुभव करो, आगे की ओर झुको और गुरुत्वाकर्षण को अनुभव करो, पीछे झुको और गुरुत्वाकर्षण को अनुभव करो। फिर केंद्र को अनुभव करो जहां गुरुत्वाकर्षण का  खिंचाव सबसे कम अनुभव हो, और वहीं रहो। फिर शरीर को भूल जाओ और महसूस करो कि तुम वजन नहीं हो, तुम्हारा कोई वजन नहीं है। फिर इस वजन रहितता को अनुभव करते रहो।
अचानक तुम्हारा वजन खो जाएगा, अचानक तुम शरीर नहीं होओगे, अचानक तुम वजन रहितता के अलग ही विश्व में हो ओगे।
वजन रहित होना अशरीरी होना है; उसके बाद तुम मन के भी पार जाओगे। मन भी शरीर का हिस्सा है, वजन का हिस्सा है। सिर्फ तुम्हारा कोई वजन नहीं है। यही इस विधि का आधार है।
ओशो, दि बुक ऑफ सीक्रेट्स, # 7