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Month: June 2018

Osho Osho Meditation &Amp; Relationship
Guide

अचेतन में प्रवेश की विधि 

जागते हुए नींद में प्रवेश कर स्वप्न पर अधिकार करने के दो अद्भुत प्रयोग – हमारे सपने का, हमारी गहरी नींद का अतिक्रमण कैसे हो सकता है? अतिक्रमण के संबंध में यह प्रश्न अर्थपूर्ण है, ‘क्या समझाने की कृपा करेंगे कि स्वप्न देखते हुए बोधपूर्ण होने के अन्य उपाय क्या हैं?’ मैं यहां और दो उपायों की चर्चा करूंगा। एक उपाय की चर्चा की थी, आज अन्य दो की करूंगा जो और भी आसान हैं।…

Nightlife Osho Meditation &Amp; Relationship
Guide

वैराग्य नहीं , राग को गहरा करने की कला सीखना: ओशो 

प्रेम के सौ रंग ————————————— मैं प्रेम—विरोधी नहीं हूं—यही मेरी देशना है। यही मेरा मौलिक संदेश है। मैं संसार—विरोधी नहीं हूं। मैं संसार के अति प्रेम में हूं। मैं तुम्हें वैराग्य नहीं सिखाता, मैं तुम्हें राग को गहरा करने की कला सिखाता हूं। मैं तुम्हें निषेध नहीं सिखाता कि तुम भागो और छोड़ो और जंगलों में चले जाओ। मैं तो उस भगोड़ेपन को मूढ़ता कहता हूं। मैं तो कहता हूं इस संसार में थोड़े गहरे…

Vision Osho Osho Meditation &Amp; Relationship
Motivation

प्रश्न:- क्या प्रेम के बिना समर्पण हो सकता है? 

ओशो:- ऐसा लगता है, बहुत बार तुम सोचते भी नहीं कि क्या पूछ रहे हो! प्रेम और समर्पण का एक ही अर्थ होता है। प्रेम के बिना कैसा समर्पण। और अगर समर्पण न हो तो कैसा प्रेम! प्रेम के बिना तो समर्पण हो ही नहीं सकता। प्रेम के बिना जो समर्पण होता है, वह समर्पण नहीं है, जबरदस्ती है। जैसे किसी आदमी ने तुम्हारी छाती पर छुरी रख दी और कहा, करो समर्पण! और तुम्हें…

106 Osho Meditation &Amp; Relationship
Osho On Topics

गुरजिएफ कहता है, “तुम मात्र शरीर के और कुछ नहीं 

जॉर्ज गुरजिएफ गुरजिएफ कहता है, “तुम मात्र शरीर के और कुछ नहीं, और जब शरीर मरेगा तुम भी मरोगे। कभी एकाध दफा कोई व्यक्ति मृत्यु से बच पाता है–केवल वही जो अपने जीवन में आत्मा का सृजन कर लेता है मृत्यु से बचता है–सब नहीं। कोई बुद्ध; कोई जीसस, पर तुम नहीं। तुम बस मर जाओगे, तुम्हारा कोई निशान नहीं बचेगा।” गुरजिएफ क्या करना चाह रहा था? वह तुम्हें तुम्हारी जड़ों से हिला रहा था;…

135 0 1 Osho Meditation &Amp; Relationship
Vision

नीति और धर्म दो विपरीत दिशाएं 

मैं नीति और धर्म की दिशाओं को भिन्न मानता हूं; भिन्न ही नहीं, विपरीत मानता हूं—क्यों मानता हूं, उसे समझाना चाहता हूं। नीति-साधना का अर्थ है : आचरण-शुद्धि, व्यवहार-शुद्धि। वह व्यक्तित्व की परिधि—को बदलने का प्रयास है। व्यक्तित्व की परिधि मेरा दूसरों से जो संबंध है, उससे निर्मित होती है। वह दूसरों से मेरा व्यवहार है। मैं दूसरों के साथ कैसा हूं, वही मेरा आचरण है। आचरण यानी संबंध, रिलेशन।मैं अकेला नहीं हूं। मैं अपने…

114 Osho Meditation &Amp; Relationship
Lifestyle

मैं नहीं चाहता कि तुम संपूर्ण हो जाओ। OSHO 

अमोघता (कभी गलत न होना) पूर्णता एक विक्षिप्त विचार है। अमोघता यानि कभी गलत न होने वाली बात मूर्ख पोलक पोप के लिए उचित है पर समझदार लोगों के लिए नहीं। बुद्धिमान व्यक्ति समझेगा कि जीवन एक जोखिम है, सतत खोज है प्रयास और गलतियों के द्वारा। यही आनंद है, यह बहुत रसपूर्ण है। मैं नहीं चाहता कि तुम संपूर्ण हो जाओ। मैं चाहता हूं कि तुम जितना संभव हो उतना पूर्ण रूप से, अपूर्ण…

Lord Buddha 106A Osho Meditation &Amp; Relationship
Vision

क्या मनुष्य को धर्म की आवश्यकता है? 

वास्तविक धर्म को ईश्वर और शैतान, स्वर्ग और नरक से कुछ लेना-देना नहीं है। धर्म के लिए अंग्रेज़ी में जो शब्द है “रिलीजन’ वह महत्वपूर्ण है। उसे समझो, उसका मतलब है खंडों को, हिस्सों को संयुक्त करना; ताकि खंड-खंड न रह जाएं वरन पूर्ण हो जाएं। “रिलीजन’ का मूल अर्थ है एक ऐसा संयोजन बिठाना कि अंश अंश न रहे बल्कि पूर्ण हो जाए। जुड़ कर प्रत्येक अंश स्वयं में संपूर्ण हो जाता है। पृथक…

Osho On Topicsgiving Osho Meditation &Amp; Relationship
Osho On Topics

प्रेम तब निर्दोष होता है जब उसमें कोई वजह नहीं होती। 

प्रेम निर्दोष होता है जब यह और कुछ नहीं बस ऊर्जा का बांटना होता है। तुम्हारे पास बहुत अधिक है, इसलिए तुम बांटते हो… तुम बांटना चाहते हो। और जिसके साथ भी तुम बांटते हो, तुम उसके प्रति अनुग्रह महसूस करते हो, क्योंकि तुम बादल की तरह थे–बरसात की पानी से बहुत भरे हुए–और किसी ने तुम्हें हल्का होने में मदद की। या तुम फूल जैसे थे, खुशबू से भरे हुए, और हवा आकर तुम्हें…