Guide

The guide is not outside, the guide is within you. One has to go deeper into one´s own being to find the guide. Once the inner guide is found there are no more mistakes, no repentance, no guilt. There is no question of doing good or doing bad; whatsoever one does is good. It is not a question of morality either; one´s very being is good and whatsoever comes out of it is good. One walks in light and one walks lightly because the head and the burden of the head is no more there. And when one walks in light and walks lightly, life becomes laughter, love, joy.

Once the guide is found, you have found the master within yourself.

Do-I-Really-Want-to-Be-Alone

ओशो के जीवन बदल देने वाले विचार ! – Osho ke vichar hindi

‘ओशो रजनीश’ जो लोग ओशो रजनीश के जीवन के बारे में कुछ खास नहीं जानते उनके लिए ओशो का नाम दुनियाभर के प्रसिद्ध बाबाओं और गुरुओं में से एक ही है। इससे ज्यादा की बात करें तो उनके लिए ओशो की पहचान एक ऐसी विवादित शख्सियत की है, जिन्होंने हमेशा स्वच्छंद जीवन और फ्री सेक्स […]

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नृत्य में डूबो और उत्सव मनाओ | Dive into the dance and celebrate – Osho

निश्चित ही यही धर्म है। और अगर तुम नृत्य में डूब सकते, गीत नहीं गा सकते, उत्सव नहीं मना सकते-तो और क्या करोगे? पहली तो बातः तुम अपनी फिकर के लिए यहां आए हो कि सबकी फिकर के लिए? तुमने कोई ठेका लिया है सारे लोगों की फिकर का? तुम कौन हो उनकी चिंता करने

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OSHO Life style "Sex and Obscenity

“कामवासना और अश्लीलता ! Sex and Obscenity” – ओशो

अभी मैं एक गांव में था। और कुछ बड़े विचारक और संत-साधु मिल कर अश्लील पोस्टर विरोधी एक सम्मेलन कर रहे थे । तो उनका ख्याल है कि अश्लील पोस्टर लगता है दीवाल पर, इसलिए लोग कामवासना से परेशान रहते हैं। जब कि हालत दूसरी है, लोग कामवासना से परेशान हैं, इसलिए पोस्टर में मजा है।

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सेक्‍स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है: ओशो

सेक्‍स से संबंधित किसी नैतिकता का कोई भविष्‍य नहीं है। सच तो यह है कि सेक्‍स और नैतिकता के संयोजन ने नैतिकता के सारे अतीत को विषैला कर दिया है। नैतिकता इतनी सेक्‍स केंद्रित हो गई कि उसके दूसरे सभी आयाम खो गये—जो अधिक महत्‍वपूर्ण है। असल में सेक्‍स नैतिकता से इतना संबंधित नहीं होना

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किसी पर ध्‍यान मत दो …. ओशो

गलत तपस्‍वी सिर्फ आदत बनाता है तप की। ठीक तपस्‍वी स्‍वभाव को खोजता है, आदत नहीं बनाता। हैबिट और नेचर का फर्क समझ लें। हम सब आदतें बनवाते है। हम बच्‍चे को कहते है—क्रोध मत करो, क्रोध की आदत बुरी है। न क्रोध करने की आदत बनाओ। वहन क्रोध करने की आदत तो बना लेता

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