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[vc_row][vc_column][vc_gallery type=”flexslider_slide” interval=”3″ images=”862,863,1008,1009″ img_size=”full”][vc_column_text]ओशो की दृष्टि या स्वयं के बारे में ओशो उद्धरण या अपना मासिक राशिफल इस पेज पर देखें। आप स्वास्थ्य से संबंधित समयातीत विषय “बॉडी धर्म’ पर खोज सकते हैं: स्वाभाविक रूप से उठने वाले भावों को दबाने से शरीर के ऊर्जा-चक्रों में असंतुलन उत्पन्न होता है, जो आपकी जिंदगी को प्रभावित करता है – और मृत्यु को भी।

और संबंधों के लिए “दि अदर: माईसेल्फ’: यह एक अत्यंत खतरनाक बात है कि हमारी परवरिश के दौरान हमें सदव्यवहार (दूसरों की नजरों में भला बनना) सिखाया जाता है। और प्रायः इसका अर्थ होता है अपने स्वाभाविक भावों को दबाना।

जब आप ध्यान शुरू करते हैं, वे दबी हुई भावनाएं आवश्यक रूप से उभरना शुरू करती हैं…

और भावनाओं के लिए “इमोशनल इकोलॉजी: चाहे हम स्कूल में गोली चलने की एक और घटना की बात करें या वैवाहिक प्रताड़ना की, हम अपनी भावनाओं को कैसे सम्हालते हैं इस विषय पर हमें तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।

ओशो की समझ में एक ऐसा व्यक्ति जिसकी भावनाएं हमेशा से दबी हुई हैं, कभी न कभी अपनी भावनाओं के आवेश में उसमें हिंसा का विस्फोट होता है।

“बात लोगों तक पहुंचनी चाहिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग यह बात आज समझें या कल या परसों–पर एक दिन वे समझेंगे।

“एक बात मैं कह सकता हूं कि जो मैं कह रहा हूं वह भविष्य का दर्शनशास्त्र होगा, भविष्य में पूरी मानवता का धर्म; और यह तुम्हारा सौभाग्य है कि तुम इसके सह-निर्माता हो।”

ओशो[/vc_column_text][/vc_column][/vc_row]